February 5, 2026 11:21 am

प्रदूषण: इंसान की सबसे बड़ी भूल

आज पूरी दुनिया जिस सबसे गंभीर संकट से जूझ रही है, उसका नाम है प्रदूषण। यह कोई एक दिन में पैदा हुई समस्या नहीं है, बल्कि वर्षों से की जा रही इंसानी लापरवाही का नतीजा है। विकास की अंधी दौड़ में हमने प्रकृति को केवल संसाधन समझा, उसे माँ मानकर कभी सम्मान नहीं दिया।हवा, पानी, मिट्टी—तीनों आज प्रदूषण की चपेट में हैं। शहरों की हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि सांस लेना भी खतरे से खाली नहीं रहा। कारखानों से निकलता धुआँ, वाहनों का बढ़ता प्रदूषण और निर्माण कार्यों की धूल ने वातावरण को ज़हर से भर दिया है। हालात ऐसे हैं कि कई महानगरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पार कर चुका है।प्रदूषण का सबसे बड़ा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अस्थमा, फेफड़ों की बीमारियाँ, दिल के रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ लगातार बढ़ रही हैं। बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्टें बताती हैं कि हर साल लाखों लोगों की असमय मौत केवल प्रदूषण की वजह से हो रही है।जल प्रदूषण भी उतना ही भयावह है। नदियाँ, जो कभी जीवन की धारा थीं, आज औद्योगिक कचरे और सीवेज का ठिकाना बन चुकी हैं। गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियाँ भी इस संकट से अछूती नहीं हैं। दूषित पानी पीने से हैजा, टायफाइड और अन्य जलजनित रोग फैल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पानी की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।मिट्टी प्रदूषण का असर खेती पर पड़ रहा है। रासायनिक खाद, कीटनाशक और प्लास्टिक कचरा ज़मीन की उर्वरता को खत्म कर रहे हैं। इससे फसलों की गुणवत्ता गिर रही है और खाद्य श्रृंखला प्रभावित हो रही है। जो ज़हर हम धरती में डाल रहे हैं, वही भोजन बनकर हमारे शरीर में लौट रहा है।प्रदूषण का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से भी है। ग्लोबल वॉर्मिंग, बर्फ का पिघलना, समुद्र का जलस्तर बढ़ना, असामान्य बारिश और सूखा—ये सभी चेतावनी हैं कि प्रकृति अब और सहन नहीं करेगी। जंगलों की अंधाधुंध कटाई ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।लेकिन अभी भी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। अगर हम आज जाग जाएँ, तो आने वाले कल को बचाया जा सकता है। हमें व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव लाने होंगे। प्लास्टिक का उपयोग कम करना, पेड़ लगाना, सार्वजनिक परिवहन अपनाना और ऊर्जा की बचत करना—ये छोटे कदम बड़ा बदलाव ला सकते हैं।सरकार और उद्योगों की जिम्मेदारी के साथ-साथ आम नागरिक की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई तभी जीती जा सकती है, जब हर इंसान इसे अपनी लड़ाई समझे।

याद रखिए—
धरती है तो हम हैं।
अगर प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य बचेगा।

Leave a Comment

और पढ़ें

best news portal development company in india

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें